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राफेल पूजा पर घिरे राजनाथ सिंह को मिला पाकिस्तानी आर्मी का साथ, आसिफ गफूर ने दिया बड़ा बयान

नई दिल्ली। दशहरे के दिन फ्रांस में राफेल लड़ाकू विमान लेने से पहले उसकी पूजा करने वाले रक्षामंत्री राजनाथ सिंह को भारत में कांग्रेस सहित कई लोगों का विरोध झेलना पड़ा। कांग्रेस ने तो इसे केंद्र सरकार का नाटक करार दे दिया। वहीँ अब पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता आसिफ गफूर ने गुरुवार को ‘राफेल पूजा’ को लेकर रक्षामंत्री राजनाथ सिंह का बचाव किया है।

आसिफ गफूर ने कहा कि ‘राफेल पूजा में कुछ भी गलत नहीं है क्योंकि यह धर्म के अनुसार है।’ आसिफ गफूर ने गुरुवार को ट्वीट किया, “राफेल पूजा में कुछ भी गलत नहीं हैं क्योंकि यह धर्म के अनुसार है। कृपया, याद रखें।यह अकेली मशीन नहीं जो मायने रखती है असल में उस मशीन को संभालने वाले व्यक्ति की क्षमता, जुनून और संकल्प मायने रखता है। हमें हमारे पीएएफ शहीदों पर गर्व हैं।“

बता दें कि फ्रांस से पहले राफेल लड़ाकू विमान मिलने के बाद रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने शस्त्र पूजा की थी जिसकी सोशल मीडिया पर खूब चर्चा हुई। उन्होंने नये विमान पर ‘ओम’ भी लिखा। उन्होंने दो सीट वाले विमान पर उड़ान भरने से पहले फूल और नारियल भी चढ़ाये।

इसके बाद कांग्रेस नेताओं ने राफेल लड़ाकू विमान प्राप्त करने के लिए रक्षामंत्री राजनाथ सिंह की फ्रांस यात्रा और राफेल विमान पर उनके शस्त्र पूजन को तमाशा करार दिया और भाजपा पर रक्षा खरीद को राजनीतिक रंग देने का आरोप लगाया। कांग्रेस नेता राशिद अल्वी ने कहा, ‘‘यह नाटकों की सरकार है। आप फ्रांस जाकर पूजा कर रहे हैं। क्या राफेल विमान भारत नहीं आने वाला था? आप दूसरे देश में जाकर यह सब तमाशा कर रहे हैं।’’

सिंह के शस्त्र पूजन को ‘तमाशा’ करार देने के अल्वी के बयान पर कुछ तीखी प्रतिक्रियाएं आईं जिस पर कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि वह पूजा की बात नहीं कर रहे बल्कि इस बात पर सवाल खड़ा कर रहे हैं कि राफेल विमान की आपूर्ति और अन्य तकनीकी मामलों में नेता क्यों शामिल हो रहे हैं।

खड़गे ने कहा कि उन्होंने शस्त्र पूजा की आलोचना नहीं की और उनका यह कहना था कि विमान को आने में 6-8 महीने लगेंगे, ऐसे में वहां यह करने की क्या जरूरत थी, जब वह आ जाता तब करते। हालांकि, खड़गे के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए असंतुष्ट कांग्रेस नेता संजय निरूपम ने कहा कि शस्त्र पूजा को तमाशा नहीं कहा जा सकता। यह हमारे देश की हजारों साल पुरानी परंपरा है।

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