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राफेल की डिलीवरी लेने फ्रांस पहुंचे राजनाथ सिंह, करेंगे शस्त्र पूजा

नई दिल्ली। आज का दिन भारतीय वायुसेना के लिए बहुत ख़ास होने वाला है क्योंकि आज ही दुनिया के सबसे घातक लड़ाकू विमानों में से एक राफेल भारत को मिलने जा रहे हैं। रक्षामंत्री राजनाथ सिंह राफेल लेने पेरिस पहुंच गए हैं। यहां वह शस्त्र पूजा भी करेंगे। दसौ के साथ हुए सौदे की पहली खेप में भारत विजयादशमी के मौके पर 4 राफेल विमान हासिल करेगा।

भारत में शस्त्र पूजा की परंपरा अनादिकाल से चली आ रही है। महाराणा प्रताप की इस धरती पर राजपूत राजा दुश्मनों को रणभूमि में छक्के छुड़ाने से पहले अस्त्र-शस्त्र की पूजा करते रहे हैं। इसी परंपरा का पालन करते हुए भारतीय सेना में भी विजयादशमी के दिन शस्त्र पूजा की जाती है। शायद इसी परंपरा को निभाने के लिए राफेल विमान का अधिग्रहण विजया दशमी के दिन हो रहा है। आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को विजयादशमी मनाई जाती। इसी दिन भगवान राम ने लंका के राजा रावण पर विजय प्राप्त की थी। इसलिए विजया दशमी को आसुरी शक्तियों पर देवता की विजय के रूप में मनाया जाता है।

शस्त्र पूजा के साथ लड़ाकू राफेल के अधिग्रहण के पीछे शायद यही धारणा होगी कि यह विमान भारत की ओर आंख उठाने वाली हर ताकत को नेस्तनाबूद करने में देश के सैन्य बल के लिए अहम साबित होगा। बताया जाता है कि भारतीय वायुसेना के बेड़े में इस लड़ाकू विमान के शामिल होने पर देश की सामरिक ताकत बढ़ेगी और दक्षिण एशिया में जहां पाकिस्तान का हमेशा शत्रुता का बर्ताव रहा है वह आंख उठाकर देखने की हिमाकत नहीं करेगा। रक्षा विशेषज्ञों की माने तो राफेल की क्षमता के समान पाकिस्तान के पास अब तक कोई विमान नहीं है।

सेवानिवृत्त एयर मार्शल एम मथेश्वरण ने बताया, “पाकिस्तान के पास मल्टी रोल विमान एफ-16 है। लेकिन वह वैसा ही है जैसा भारत का मिराज-2000 है। पाकिस्तान के पास राफेल जैसा कोई विमान नहीं है।” फ्रांस, मिस्र और कतर के बाद भारत चौथा देश होगा जिसके आकाश में राफेल विमान उड़ान भरेगा। राफेल 4।5वीं पीढ़ी का विमान है जिसमें राडार से बच निकलने की युक्ति है। इससे भारतीय वायुसेना (आईएएफ) में आमूलचूल बदलाव होगा क्योंकि वायुसेना के पास अब तक के विमान मिराज-2000 और सुखोई-30 एमकेआई या तो तीसरी पीढ़ी या चौथी पीढ़ी के विमान हैं।

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