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संगीतकार खय्याम की हालत नाज़ुक, आईसीयू में हुए भर्ती

मुंबई। फिल्मी सितारों की दुनिया में यूँ तो बीते 100 सालों में कई सितारे चमके। कुछ चमकने के बाद बादलों की आढ़ में ओझिल हो गए तो कुछ की टिमटिमाहट ने आसमान में चार चाँद लगा दिए। सन् 1953 में फिल्म फुटपाथ से भी ऐसा ही एक सितारा आसमान में चमचमाया जिसका नाम है मोहम्मद ज़हूर हाशमी जिन्हें हम सभी संगीतकार खय्याम के नाम से जानते है। यह क्या जगह है दोस्तों, कभी -कभी मेरे दिल में, मोहब्बत बड़े काम की चीज़ है यह और ऐसे इंडस्ट्री के कई नगमे है जो आज भी हर किसी के ज़हन में तरो-ताज़ा है।

इन गानों को यादगार बनाने में संगीतकार खय्याम का बहुत बड़ा हाथ रहा है, इन सभी गानों का दिल को छू लेने वाला संगीत दिया है खय्याम साहब ने। खय्याम साहब का नाम आज एक बार फिर सुर्खियों में आया है पर इस बार किसी अवार्ड मिलने की खुशी में नहीं बल्कि उनकी खराब सेहत के चलते। जी हाँ, संगीतकार खय्याम फेफड़ो के संक्रमण से पिड़ित है और रविवार को उन्हें मुंबई के अस्पताल में भर्ती कराया गया तब से वे आइसीयू में ही हैं और डॉक्टरों की टीम उनके इलाज में लगी है।

इस लेजेंड्री संगीतकार का जन्म 18 फरवरी 1927 को हुआ था बच्चपन से ही इन्हें संगीत से बेहद लगाव था इसी के चलते 17 वर्ष की छोटी सी आयु से ही इन्होनें अपने संगीत पर काम करना शुरु कर दिया था। इसके बाद संघर्ष का लंबा दौर चला उन्हें अपने शुरुआती दिनों कई मुश्किल हालातों का सामना भी करना पड़ा लेकिन वह कहते है ना काले बादल आसमान पर कितने भी छा जाए पर उगते हुए सूर्य के प्रकाश का रास्ता नहीं रोक सकते।

खय्याम साहब का भी वक्त बदला और उनकी ज़िन्दगी गुलज़ार होना शुरु हो गई । उन्हें पहला ब्रेक मिला सन् 1953 में आई फिल्म फुटपाथ में। पर अभी इन्हें अपनी असली पहचान मिलने का इंतज़ार था और वह इन्हें मिली साल 1961 में आई फिल्म शोला और शबनम में संगीत देकर और यहाँ से उनके काम को पहचानना लोगों ने शुरू किया। और इसके बाद इस संगीतकार ने पिछे मुड़कर कभी नहीं देखा, नाम और शोहरत इनके आगे चलती रही, आखिरी खत, कभी-कभी, त्रिशूल, नूरी, बाजार, उमराव जान और यात्रा जैसी फिल्मों को इन्होनें अपनी धुनों से सजाया।

इंडस्ट्री के कई बड़े अवार्ड से खय्याम साहब को नवाज़ा भी गया। बात करें उन्हें मिले अवार्डस की तो उन्हें साल 2007 में संगीत नाटक एकेडमी अवॉर्ड और साल 2011 में पद्म भूषण जैसे सम्मानों से नवाजा गया, कभी-कभी और उमराव जान के लिए उन्हें फिल्मफेयर अवॉर्ड और उमराव जान के लिए नेशनल अवॉर्ड भी दिया गया और आपको शायद ही यह बात मालूम हो कि साल 2007 में आई फिल्म यात्रा में संगीत खय्याम साहब ने दिया था। इस फिल्म में रेखा और नाना पाटेकर लीड रोल में थे।

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