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यशवंत सिन्हा कैसे बने थे वित्त मंत्री: रवीश कुमार ने खोला राज़

नई दिल्ली। अटल बिहारी बाजपेयी सरकार में वित्त मंत्री रहे यशवंत सिन्हा की आत्मकथा पुस्तक ‘रेलेंटलेस’ का 15 जनवरी को पूर्व राष्ट्रपति श्री प्रणब मुख़र्जी द्वारा विमोचन किया जाएगा। इसकी जानकारी खुद यशवंत मिश्रा ने अपने ट्विटर अकॉउंट पर ट्वीट कर दी। उन्होंने लिखा, ”मेरी आत्मकथा ‘रिलेंटलेस’ (Relentless) पुस्तक 15 जुलाई को पूर्व राष्ट्रपति श्री प्रणब मुखर्जी द्वारा आईआईसी के मल्टिपर्पज हॉल में शाम 6 बजे विमोचन किया जाएगा। इस पुस्तक के एक अंश का ज़िक्र करते हुए रवीश कुमार ने फेसबुक पर एक पोस्ट किया जिसमें उन्होंने बताया कि कैसे यशवंत सिन्हा अटल सरकार के मंत्री मंडल में शामिल हुए और उन्हें वित्त मंत्री बनाया गया।

रवीश कुमार ने लिखा, ”तब तक यशंवत सिन्हा को पता ही नहीं था कि वे भारत के वित्त मंत्री होने वाले हैं। गोविंदाचार्य के कहने पर दिल्ली आ गए। शपथ ग्रहण के बाद भी मंत्रालय का पता नहीं था। वाजपेयी से नज़र टकराई तो कहा कि आपको हमारे क्षेत्र आना है। जवाब में वाजपेयी ने कहा कि तब बजट कौन बनाएगा। वे वित्त मंत्री हो गए। लिखा है कि वसंत विहार के दो कमरे के मकान में जगह ही नहीं थी। बधाई देने वालों से घर भर गया था। मगर अगले दिन पता चला कि जयललिता ज़ोर दे रही थी कि उनके सांसद को राजस्व का स्वतंत्र प्रभार दिया जाए।

यशवंत सिन्हा ने वाजपेयी को समझाया कि तब तो मंत्रालय ही हाथ से चला जाएगा। वाजपेयी ने जसवंत सिंह से कहा कि फिर बात कीजिए। तब भी जयललिता नहीं मानीं। वाजपेयी ने यशवंत सिन्हा से कहा कि आप ही संभालो। यशवंत सिन्हा अपने सचिव मोंटेक सिंह अहलूवालिया के पास जाते हैं और कहते हैं कि अपनी अंग्रेज़ी का इस्तमाल करो और रास्ता निकालो। मोंटेक ऐसी भाषा का इस्तमाल करते हैं कि राजस्व का अधिकार यशवंत सिन्हा के पास रह गया और मंत्रालय का नाम जयललिता के सांसद आर के कुमार के पास। यशवंत सिन्हा ने अपनी आत्मकथा लिखी है। Relentless। हमने जो पन्ना पलटा उस पर यही मिला। ब्लूमबर्ग ने छपाई की है।”

रिपोर्ट: पूर्णिमा सिंह

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