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राहुल ने ठुकराई अपने 51 सांसदों की मांग, कहा- अब अध्यक्ष नहीं रहूंगा

2019 के लोकसभा चुनाव में मिली हार के बाद कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने हार का जिम्मा अपने सिर लेते हुए अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने का एलान कर दिया था। पार्टी सदस्यों के लाख मनाने के बावजूद भी राहुल अपने इस फैसले पर अड़े हुए हैं। बुधवार को संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) की अध्यक्ष सोनिया गांधी की अध्यक्षता में कांग्रेस के लोकसभा सांसदों की बैठक हुई। इस बैठक में राहुल गांधी सहित पार्टी के 51 लोकसभा सांसद भी शामिल थे। बैठक में सांसदों ने राहुल गांधी से उनके इस्तीफ़ा देने के फैसले पर चर्चा की और अपना फैसला बदलने की मांग की जिसपर राहुल गांधी ने ये साफ़ साफ़ कह दिया की वो अब पार्टी अध्यक्ष नहीं रहेंगे।

इस्तीफे के फैसले को लेकर राहुल गांधी पहली बार मीडिया के सामने आये। उन्होंने कहा कि आज की बैठक में उन्होंने इस्तीफे को लेकर अपना स्टैंड साफ़ कर दिया। बैठक में मौजूद कांग्रेस सांसद शशि थरूर और मनीष तिवारी ने ये तर्क देते हुए राहुल को मनाने की कोशिश की कि चुनाव में मिली हार उनकी निजी जिम्मेदारी नहीं है बल्कि ये पार्टी की सामूहिक तौर पर जिम्मेदारी है लेकिन राहुल अपने फैसले से टस से मस न हुए। बैठक में मौजूद 51 सांसदों की अपील करने पर भी राहुल ने अपना फैसला नहीं बदला।

इससे पहले भी राहुल पार्टी की बैठक में इस्तीफ़ा देने की बात कर चुके हैं जिसे कार्यसमिति ने खारिज कर दिया था। बैठक में उन्होंने इस्तीफ़ा देने की बात साथ साथ ये तक कहा कि उनकी जगह पार्टी अध्यक्ष के लिए प्रियंका गांधी का नाम भी प्रस्तावित न किया जाये बल्कि किसी गैर कांग्रेसी को पार्टी का अध्यक्ष बनाया जाए लेकिन कार्यसमिति ने उनकी बात को टालते हुए कहा कि पार्टी को उनके मार्गदर्शन की जरूरत है और उनका कोई प्रतिस्थापन नहीं है।

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