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कठुआ गैंगरेप और मर्डर केस: 3 दोषियों को उम्रकैद की सजा, तीन को 5-5 साल

नई दिल्ली। पिछले साल जम्मू कश्मीर के कठुआ में 8 साल की बच्ची से दुष्कर्म और हत्या के मामले में कोर्ट ने अपना फैसला सुना दिया है। एक साल से सिसकती मां और तड़पती बिटिया की आत्मा को आज इंसाफ मिल गया। कोर्ट ने कुल 7 में से 6 आरोपियों को दोषी करार दिया है। इस मामले में कोर्ट ने तीन दोषियों सांजी राम, दीपक खजूरिया और परवेश कुमार को उम्रकैद की सज़ा सुनाई है।इन तीनों आरोपियों को एक-एक लाख रुपये जुर्माने के तौर पर भी देना होगा।

वहीं तीन पुलिस वालों सुरेंद्र कुमार, हेड कांस्टेबल तिलक राज और आनंद दत्ता को 5-5 साल की कैद और 50 हज़ार जुर्माने की सज़ा सुनाई है। जुर्माना नहीं देने की स्थिति में तीनों पुलिस वालों छह महीने और जेल में बिताने होंगे। वहीं सांजी राम के बेटे विशाल को अदालत ने सबूतों के अभाव में बरी कर दिया गया है।

10 जनवरी 2018 को अगवा हुई मासूम को कठुआ जिले के गांव के एक मंदिर में बंदी बनाकर उसके साथ दुष्कर्म किया गया था और फिर चार दिन बाद उसकी हत्या कर दी गयी थी। इस मामले में ग्राम प्रधान सांझी राम, उसके बेटे विशाल, नाबालिक भतीजे और दोस्त आनंद दत्ता सहित दो पुलिस अधिकारियों (दीपक खजुरिया, सुरेंद्र वर्मा) को गिरफ़्तार किया गया। सांझी राम से 4 लाख रूपए रिश्वत लेने और सबूत मिटाने के जुर्म में हेड कांस्टेबल तिलक राज और एस आई आनंद दत्ता को भी गिरफ्तार किया गया।

सूत्रों के अनुसार इस मामले का पता सांझी राम को तब हुआ जब 13 जनवरी को वह मदिर से पूजा करके आया और अपने भतीजे को प्रसाद घर ले जाने को बोला लेकिन वह देर करता रहा। इस बात से नाराज़ होकर सांझी उसके आते ही उसे पीटने लगा और भांजे को लगा कि चाचा को बच्ची के बारे में सब कुछ मालूम हो गया। उसने सब कुछ अपने चाचा के सामने कबूल कर लिया और साथ ही अपने चचेरे भाई (सांझी का बेटा) के भी शामिल होने का खुलासा किया। इस बात से घबरा कर सांझी राम ने 14 जनवरी को उस मासूम की हत्या कर दी ताकि उसके बेटे पर कोई आंच ना आये लेकिन उसके बाद की स्थिति उनकी योजना के परे रही।

उच्च न्यायालय ने इस मामले को जम्मू-कश्मीर से 100 किलोमीटर दूर और कठुआ से 30 किलोमीटर दूर पटाहकोट की अदालत को दे दिया और लम्बी कार्यवाई के बाद जिला एवं सत्र अदालत ने इनमें से 6 लोगों को दोषी करार दिया है।

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