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जज ने पीड़िता से कहा-“पैर समेट कर बैठती तो नहीं होता रेप”, सुप्रीम कोर्ट ने किया सस्पेंड

न्‍यू जर्सी। अमेरिका दुनिया के सबसे ताकतवर देशों में आता है। दुनियका के कई बड़े देश उससे लड़ने के पहले कई बार सोचते हैं। अमेरिका अपने देश और अपने देश के लोगों की सुरक्षा के प्रति बेहद संजीदा है, वहां का क़ानून किसी भी प्रकार के जुर्म पर सख्त से सख्त कार्यवाही करता है। लेकिन उसी देश से एक ऐसी घटना सामने आई है जिसके बाद वहां का कानून शर्मसार है।जब महिला ने अपनी आपबीती जज के सामने रखी तो जज ने कहा की वो पैर समेट कर बैठती तो शायद उसके साथ बलात्‍कार नहीं होता। जज की इस टिप्‍पणी के बाद अब उन पर सस्‍पेंशन की तलवार लटक रही है। जज का नाम जॉन रूसो है और उन्‍होंने यह टिप्‍पणी साल 2016 के बलात्‍कार मामले में की थी। जॉन रूसो को एथिक्‍स कमेटी ने तीन माह की तक बर्खास्‍त करने की सलाह दी है। इस दौरान उन्‍हें किसी तरह की सैलरी भी नहीं दी जाएगी।

ऐसा ही एक मामला साल 2016 में आया था जो सुपीरियर कोर्ट के जज जॉन रूसो से जुड़े हुए हैं। साल 2017 से रूसो एडमिनिस्‍ट्रेटिव लीव पर हैं। साल 2016 पीड़‍िता उस व्‍यक्ति के खिलाफ कोट्र से आदेश चाहती थी जिसने उसका बलात्‍कार किया था। जब पीड़‍िता ने कोर्ट को बताया कि किस तरह से उसका, आरोपी से सामना हुआ तो उसी समय रूसो की यह दिल दुखाने वाली टिप्‍पणी आई। रूसो ने महिला से पूछा, ‘क्‍या आप जानती हैं कि कैसे किसी को आपके साथ इंटरकोर्स करने से रोका जा सकता है?’ अदालत के दस्‍तावेजों में रूसो ने इस बात से साफ इनकार कर दिया है कि उन्‍होंने किसी भी तरह से न्‍यायिक नियमों को तोड़ा है। उनका कहना था कि वह पीड़‍िता से और ज्‍यादा जानकारी हासिल करने की कोशिश कर रहे थे न कि वह उसका कोई मानसिक शोषण करने का कोई प्रयास कर रहे थे।

Prarthana Srivastava

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