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किंगमेकर की भूमिका में उभर सकते हैं जगन

नई दिल्ली, 13 अप्रैल (आईएएनएस)| आम चुनाव के बाद के हालात को लेकर कयास है कि वे क्षत्रप शक्तिशाली बनकर उभर सकते हैं, जिन्हें कभी उपहास में राजनीतिक वातदिग्दर्शक कहे जाते थे। मतलब जो राजनीति के बयार बहने की दिशा बहने की ताक में रहते थे।

इसलिए उनके कार्यो और बयानों में छिपे मायने का विश्लेषण किए जा सकते हैं। वे 2014 के बाद से निवार्सित की तरह हासिये पर रहे हैं, लेकिन 2019 में एक बार फिर उनके विशिष्ट बनने की संभावना प्रतीत होती है।

आंध्रप्रदेश के मुख्य मंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू को चुनौती दे रहे वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के नेता वाई. एस. जगन मोहन रेड्डी प्रदेश की राजनीति में प्रमुख चेहरा हैं।

राष्ट्रीय स्तर पर संभावित भूमिका के लिए वह खुद का तैयार कर सकते हैं। इसका संकेत उनके हालिया बयान के विश्लेषण से मिलता है। उन्होंने एक तरफ कहा कि वह कांग्रेस को माफ कर चुके हैं, लेकिन दूसरी ओर उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रशंसा की है।

वाईएसआर कांग्रेस पार्टी द्वारा 2014 के विधानसभा और लोकसभा चुनाव में हासिल सीटों के मामले में पार्टी का प्रदर्शन अच्छा नहीं रहा, लेकिन वोट प्रतिशत के मामले में वह नायडू की देलगु देसम पार्टी (तेदेपा) से थोड़ा ऊपर थी।

यही कारण है कि आंध्रप्रदेश की राजनीति में उनको अहम स्थान मिला। वाईएसआर कांग्रेस पार्टी ने लोकसभा की आठ सीटों पर जीत हासिल की थी और तेदेपा को 15 सीटें मिली थी, लेकिन वाईएसआर कांग्रेस पार्टी को जहां 45.38 फीसदी वोट मिले थे वहां तेदेपा को 40.53 फीसदी। विधानसभा चुनाव में तेदेपा को जहां 44.6 फीसदी वोट मिले थे वहां वाईएसआर कांग्रेस को 44.4 फीसदी। इसमें भी तेदेपा से उनका वोट ज्यादा कम नहीं था।

जगन के वोटों का यह आधार अगर सीटें दिलाने में काम आता है और लोकसभा चुनाव में केंद्र में किसी को स्पष्ट बहुमत नहीं मिलता है तो सरकार बनाने में उनकी बड़ी भूमिका हो सकती है।

उनका उत्थान और नायडू का राजनीतिक भविष्य की दिशा बिल्कुल विपरीत है। कापू जाति का वोट और जनसेना नेता पवन कल्याण का उत्थान और बहुजन समाज पार्टी के साथ गठबंधन ये सब नायडू के लिए मुसीबत पैदा कर सकता है।

भाजपा और पवन कल्याण ने 2014 में नायडू की जीत में मदद की थी और तेदेपा ने विधानसभा की 175 सीटों में से 102 पर जीत हासिल की थी, जबकि वाईएसआर कांग्रेस पार्टी को 66 सीटें मिली थीं, लेकिन वोट प्रतिशत के मामले में दोनों दलों को तकरीबन एक समान वोट मिले थे।

नायडू को इस बार भाजपा और पवन कल्याण का समर्थन नहीं है। यह जगन मोहन रेड्डी के लिए फायदेमंद होगा।

 

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