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हिंदीभाषी 3 बड़े राज्यों में प्रजनन दर काफी ज्यादा

 संयुक्त राष्ट्र, 12 नवंबर (आईएएनएस)| भारत के तीन बड़े हिंदीभाषी राज्यों और छह गैर हिंदीभाषी राज्यों के बीच प्रजनन दर बिल्कुल विपरीत है, साथ ही भारत प्रजनन क्षमता के जनसंख्या प्रतिस्थापन स्तर के करीब है।

 संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट में इस बात का खुलासा हुआ है।

यूएन फंड फॉर पॉपुलेशन एक्टिविटीज (यूएनएफपीए) द्वारा जारी रिपोर्ट ‘द स्टेट ऑफ वर्ल्ड पॉपुलेशन 2018’ के मुताबिक, पूरे देश में प्रति महिला औसत प्रजनन दर हालांकि 2.3 है, जबकि उत्तर प्रदेश, बिहार व मध्यप्रदेश में यह 3.0 से ज्यादा है और महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल और चार दक्षिणी राज्यों में प्रतिस्थापन स्तर से नीचे है।”

रिपोर्ट के मुताबिक, दक्षिण एशिया में पाकिस्तान में प्रति महिला प्रजनन दर सबसे अधिक 3.3 है, जबकि भूटान, मालदीव और श्रीलंका में प्रति महिला प्रजनन दर 2.0 है, जो प्रतिस्थापन स्तर से नीचे पहुंच गई है। वहीं बांग्लादेश और नेपाल में प्रति महिला प्रजनन दर 2.1 है।

अगर एक देश, क्षेत्र या समूह में प्रति महिला के पास 2.1 दर से कम बच्चे होंगे, तो समय बढ़ने पर आबादी कम होती जाएगी और अगर महिलाओं के पास इस दर से अधिक बच्चे होंगे तो उनकी आबादी बढ़ना जारी रहेगी।

‘पावर ऑफ च्वाइस’ की थीम वाली इस रिपोर्ट में कहा गया है, “यह शहरी व ग्रामीण इलाकों के बीच भारी अंतर को दिखाता है और शहरी भारत की प्रजनन दर 2007 की प्रतिस्थापन स्तर पर पहुंच गई है।”

यूएनएफपीए रिपोर्ट में हालांकि किसी राज्य की प्रजनन दर नहीं दी गई है, लेकिन नीति आयोग द्वारा 2016 में मुहैया कराए गए आंकड़ों के मुताबिक, बिहार में प्रति महिला प्रजनन दर सबसे अधिक 3.3 है, जो भारत में सबसे अधिक है, जिसके बाद उत्तर प्रदेश है, जहां प्रति महिला प्रजनन दर 3.1 है।

मध्यप्रदेश के आंकड़ों में हालांकि विरोधाभास सामने साया है, यूएनएफपीए की रिपोर्ट में जहां इस राज्य की प्रति महिला प्रजनन दर तीन से अधिक बताई गई है, वहीं नीति आयोग ने मध्य प्रदेश में प्रति महिला प्रजनन दर 2.8 बताई है। हालांकि यह प्रतिस्थापन स्तर से अभी भी ऊपर है।

नीति आयोग के मुताबिक, यूएनएफपीए रिपोर्ट में उल्लेखित छह राज्यों के अलावा हिमाचल प्रदेश, दिल्ली, पंजाब और कश्मीर सहित कई राज्यों में प्रजनन दर कम है।

नीति आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, दिल्ली में प्रति महिला प्रजनन दर सबसे कम 1.6 है।

आंकड़ों के मुताबिक, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, हिमाचल प्रदेश, जम्मू एवं कश्मीर और पंजाब में प्रजनन दर 1.7 है जबकि कर्नाटक, केरल और महाराष्ट्र में यह 1.8 है।

यूएनएफपीए की रिपोर्ट कहती है कि भारत में प्रतिस्थापन स्तर से नीचे प्रजनन दर वाले राज्यों में देश की 50 फीसदी आबादी रहती है।

रिपोर्ट के मुताबिक, “भारत के कई जिलों में प्रजनन दर प्रतिस्थापन स्तर से नीचे है जबकि आधों में प्रति महिला प्रजनन दर 3.0 या उससे अधिक है।”

रिपोर्ट में कहा गया, “भारत में 2005 से 2015 के बीच अवांछित प्रजनन दर तेजी से गिरकर 0.8 से 0.4 पर पहुंच गई, जो दंपतियों के बीच गर्भावस्था को रोकने और बच्चों की संख्या पर उनकी पसंद के चलन को दिखाता है।”

संयुक्त राष्ट्र के आर्थिक व सामाजिक मामलों के विभाग (यूएनडीईएसए) के जनसंख्या प्रभाग की एक रिपोर्ट के मुताबिक, 2015 से 2020 तक भारत की जनसंख्या वृद्धि 1.1 फीसदी रहेगी, जो अगले पांच साल में घटकर 0.97 फीसदी और 2045 तक 0.27 फीसदी हो जाएगी।

रिपोर्ट में 2020 तक भारत की जनसंख्या 1.383 अरब और 2050 तक 1.658 अरब तक पहुंचने का पूर्वानुमान लगाया गया है।