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जयराम आश्रम में शुरू हुआ कवि सम्मेलन समिति का तीसरा राष्ट्रीय अधिवेशन

कवि सम्मेलन समिति का तीसरा राष्ट्रीय अधिवेशन आज जयराम आश्रम में शुरू हुआ। इस अधिवेशन में दिल्ली, हरियाणा,राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र, उत्तराखंड समेत पूरे भारत से लगभग 100 कवि-कवयित्री सम्मिलित हुए।

इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि व वरिष्ठ साहित्यकार वेद प्रताप वैदिक ने कहा, ”कवि युगद्रष्टा होता है और समाज का आइना भी। अगर आइना साफ़ होगा, तो वह समाज का असली चित्र दिखा सकेगा और फिर चित्र को खूबसूरत रंगों से भर भी सकेगा। आज कवियों पर देश समाज और संसार को सकारात्मक दिशा देने का दायित्व और अधिक बढ़ गया है।”

रासबिहारी गौड़ के संचालन में शुरू हुए उद्घाटन सत्र में पहले दिवंगत कवियों को श्रद्धांजलि दी गर्ई। सत्र के अध्यक्ष व जयराम आश्रम के मुखिया ब्रह्मचारी जी,समिति के संरक्षक सुरेन्द्र शर्मा, डॉ. अशोक चक्रधर, डॉ हरिओम पवार, डॉ कुँवर बेचैन साहित उपस्थित कवियों ने दिवंगत कवियों के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की।

संस्था अध्यक्ष अरुण जेमिनी व अन्य पदाधिकारियों ने आमंत्रित अतिथियों का स्वागत किया। सचिव रमेश मुस्कान ने समिति के उद्देश्यों और कार्यों का लेखा जोखा प्रस्तुत किया। ब्रह्मचारी जी ने समिति को बताया कि हर वर्ष जयराम आश्रम में ही आप अपना अधिवेशन निश्चित होकर करें। वही दूसरे सत्र में डॉ. प्रवीण शुक्ल ने कार्यक्रम का संयालन किया।

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता डॉ. अशोक चक्रधर ने ‘कविता के इर्दगिर्द’ विषय पर प्रभावपूर्ण सम्बोधन किया। उन्होंने कविता के भाव और अभिव्यक्ति को प्रभावित करने वाले तत्वों और वातावरण पर वास्तविकता के अलोक में महत्वपूर्ण बातें भी बताई। इस दौरान चक्रधर ने उपस्थित युवा सहित्यकारों की जिज्ञासाओं को भी शांत किया।

चिराग जैन के संचालन में हुए तीसरे सत्र में कविसम्मेलन और डिजिटल मिडिया पर खुल कर चर्चा हुई। अरुण जेमिनी और सौरभ सुमन ने अपने विचार रखे, साथ ही खुले सत्र में एक दूसरे के विचारों पर चर्चा की।