Saturday , 10 December 2016

सीजेआई ने 500 रिक्तियां गिनाई, सरकार ने कहा, 120 नियुक्तियां हुईं

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न्यायमूर्ति टी. एस. ठाकुऱ, सर्वोच्च न्यायालय, अखिल भारतीय केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण सम्मेलन, केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद

TS Thakur

नई दिल्ली | सर्वोच्च न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश(सीजेआई) न्यायमूर्ति टी. एस. ठाकुर ने शनिवार को विभिन्न न्यायालयों में खाली पड़े पदों को नहीं भरे जाने को लेकर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि विभिन्न उच्च न्यायालयों में करीब 500 न्यायाधीशों के पद रिक्त हैं। हालांकि सरकार ने कहा कि इस वर्ष 120 नियुक्तियां की गई हैं।

अखिल भारतीय केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण सम्मेलन में सीजेआई ने कहा, “उच्च न्यायालयों में लगभग 500 पद रिक्त हैं। उच्च न्यायालयों के 500 न्यायाधीशों को आज कार्यरत होना चाहिए था, लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है। बड़ी संख्या में प्रस्ताव आज भी लंबित हैं और उम्मीद की जाती है कि सरकार इस संकट को समाप्त करने के लिए इसमें हस्तक्षेप करेगी।”

न्यायमूर्ति ठाकुर ने कहा कि बुनियादी सुविधाओं के अभाव में विभिन्न न्यायाधिकरणों के अध्यक्ष के पद खाली हैं।

उन्होंने कहा कि विभिन्न उच्च न्यायालयों और न्यायाधिकरणों में बड़ी संख्या में पद खाली हैं और इससे मामलों को निपटाने में देर होती है।

सीजेआई ने कहा, “न्यायाधिकरण साजो-सामान से युक्त नहीं हैं और वे खाली पड़े हैं। एक ऐसी स्थित बन गई है कि सर्वोच्च न्यायालय का कोई भी न्यायाधीश न्यायाधिकरण का अध्यक्ष बनना नहीं चाहता। मुझे अपने सेवानिवृत्त सहकर्मियों को वहां भेजने में दुख होता है।”

केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने हालांकि ठाकुर से असहमति जताई और कहा कि केंद्र सरकार ने इस वर्ष 120 नियुक्तियां की हैं।

प्रसाद ने कहा, “हम लोग सीजेआई का सर्वाधिक सम्मान करते हैं, लेकिन आदर के साथ इससे असहमत हैं। इस वर्ष हमलोगों ने 120 न्यायाधीशों की नियुक्ति की है।”

प्रसाद ने कहा, “वर्ष 1990 से केवल 80 नियुक्तियां हुई थीं। निचली न्यायपालिकाओं में 5000 पद खाली हैं, जिसमें केंद्र सरकार की कोई भूमिका नहीं है। कुछ ऐसे काम हैं, जो केवल न्यायपालिका को करने हैं।”

न्यायमूर्ति ठाकुर की अध्यक्षता वाली पीठ ने गत 28 अक्टूबर एक सुनवाई के दौरान उच्च न्यायालयों में न्यायाधीशों की नियुक्ति से जुड़े शीर्ष अदालत की कॉलेजियम की संस्तुतियों पर कोई कार्रवाई नहीं करने को लेकर केंद्र सरकार की तीखी आलोचना की थी। पीठ ने कहा था कि ऐसा करना न्यायपालिका को पंगु बनाने और तालाबंदी के बराबर है।

इस वर्ष अप्रैल में मुख्यमंत्रियों और उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीशों के संयुक्त सम्मेलन में हालात पर न्यायमूर्ति ठाकुर लगभग रो पड़े थे। उन्होंने सरकार से न्यायपालिका की बुनियादी सुविधाओं को सुधारने और खाली पदों को भरने का आग्रह किया था।

 

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