Friday , 9 December 2016

सर्वे के अनुसार नोटबंदी पर 85 फीसदी जनता मोदी के साथ

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नोटबंदी, नरेंद्र मोदी, अरविंद केजरीवाल, ममता बनर्जी, मायावती

Narendra modi

नई दिल्ली। काले धन और भ्रष्टाचार के खिलाफ पीएम नरेंद्र मोदी के बड़े नोटों की बंदी के फैसले से कालाधन रखने वालों में कोहराम मच गया। सड़कों पर आम लोगों की लंबी लाइनें लग गईं। तो नेता सड़क पर मार्च करने लगे है। राजनीतिक दलों ने इसे आर्थिक आपातकाल करार दे दिया।

छोटे शहरों, कस्बों और गांवों में हालात सामान्य होने में थोड़ा और वक्त लगेगा लेकिन शहरों में स्थिति अब थोड़ा नियंत्रण में आ गई है। इन सबके बावजूद विपक्ष सरकार पर आक्रामक है और फैसला वापस लेने को कह रही है। लेकिन देश्‍ की जनता विपक्ष का साथ नहीं दे रही है। देश की 85 फीसदी सामान्य जनता पीएम नरेंद्र मोदी के फैसले से खुश है।

संसद से सड़क तक विरोध कर रहे कांग्रेस नेता राहुल गांधी, दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और बसपा सुप्रीमो मायावती को जनता ने आगाह भी किया है। जनता इन नेताओं के विरोध को खारिज करती है।

एक दैनिक अख़बार ने सर्वे एजेंसी मार्केटिंग एंड डेवलपमेंट रिसर्च एसोसिएट (एमडीआरए) के साथ मिलकर लोगों की नब्ज परखी। दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, बेंगलुरु, लखनऊ जैसे शहरों व आसपास के गांवों में अलग-अलग वर्ग में 825 लोगों से संपर्क साधा गया। इसमें 18-25 आयु वर्ग के लोगों की मौजूदगी सबसे ज्यादा थी।

बता दें कि पिछले कुछ दिनों में दिल्ली की राजनीति सिर्फ नोटबंदी के आसपास घूमती रही। संसद की कार्यवाही भी स्थगित रही। अख़बार ने भी राजनीतिक रूप से गर्म रहे 17-18 नवंबर को ही सर्वे के लिए चुना। इस सर्वे में जनता से सवाल किया गया और जो उत्तर आए वह विपक्षी दलों को परेशान कर सकते हैं।

एमडीआरए के प्रशिक्षित लोगों ने मेट्रो, नॉन मेट्रो और ग्रामीण इलाकों की नब्ज टटोली। सीधे सवाल पूछे और लगभग 85 फीसद ने केंद्र की मोदी सरकार को पूरे नंबर दिए। सात सवाल पूछे गए जिसमें काले धन पर लगाम, गरीबी उन्मूलन, सभी परेशानियों के बावजूद इस फैसले के पक्ष में होने या न होने, महंगाई घटने जैसे प्रश्न तो थे ही। यह भी जानने की कोशिश हुई कि इसका राजनीतिक नफा-नुकसान क्या होगा ?

आपको बता दें कि जनता ने खुलकर मोदी के पक्ष में वोट दिया। बड़ी बात यह दिखी कि फैसले को लेकर जनता में असमंजस नहीं है। वह या तो हर मुद्दे पर सरकार के साथ खड़ी है या फिर विरोध में है।

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