Saturday , 10 December 2016

महिलाओं की मुक्ति शरीर पर नहीं, मन पर निर्भर : रेणुका शहाणे

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रेणुका शहाणे

पणजि| अभिनेत्री रेणुका शहाणे का मानना है कि महिलाओं में मुक्ति का बोध उनके शरीर नहीं, बल्कि मन पर निर्भर करता है।रेणुका ने एनडीएफसी फिल्म बाजार के 10वें संस्करण के मौके पर कहा, “पर्दे पर व्यापक रूप से केवल कामुकता को ही मुक्ति के तरीके के रूप में दर्शाया गया है, लेकिन इस प्रकार का चित्रण पुरुषों को उकसाता है। फिर उसका क्या औचित्य है? हालांकि ‘पिंक’ जैसी फिल्म इस संदर्भ में बेहद प्रासंगिक है।”

उन्होंने कहा, “टेलीविजन की बजाय फिल्मों में महिलाओं का अधिक समकालीन और यथार्थवादी चित्रण हो रहा है।”रेणुका ने अपनी फिल्म ‘त्रिभंगा’ के माध्यम से निर्देशन के मैदान में कदम रखा है।उन्होंने बताया कि यह फिल्म एक परिवार की तीन पीढ़ियों की तीन महिलाओं और उनके बिखरे हुए रिश्तों की कहानी है।

रेणुका ने कहा, “एक तलाकशुदा लेखिका है, जिसकी एक बेटी है, जो एक बिखरे हुए परिवार में पली बढ़ी है और उसकी भी एक बेटी है, जो गृहणी है। एक दिन एक ऐसी घटना घटित होती है जिससे उनके रिश्तों का समीकरण बदल जाता है और उनमें एक-दूसरे के लिए अपनापन पैदा हो जाता है।”

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