Friday , 9 December 2016

पूर्वोत्तर में कृषि की असीम संभावनाएं : राधामोहन सिंह

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RADHAMOHAN

इंफाल| केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री राधामोहन सिंह ने कहा है कि पूर्वोत्तर में कृषि की असीम संभावनाएं हैं, इसलिए केंद्र सरकार इस इलाके में कृषि के विकास पर विशेष ध्यान दे रही है। उन्होंने कहा कि पूर्वोत्तर में विभिन्न कृषि प्रणालियों के साथ जैविक कृषि की संभावना देखते हुए सरकार इस क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण कृषि कार्यक्रम लागू कर रही है। इन योजनाओं में मेरा गांव-मेरा गौरव, राष्ट्रीय फसल बीमा योजना, मृदा स्वास्थ्य कार्ड, राष्ट्रीय बागवानी मिशन, कृषि विज्ञान केंद्रों का सुदृढ़ीकरण और कृषि शिक्षा का विस्तार शामिल हैं।

कृषि मंत्री ने गुरुवार को केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, इंफाल में क्षेत्रीय कृषि मेले 2016-17 के उद्घाटन के मौके पर ये बातें कहीं।

इस मेले का विषय ‘दूसरी हरित क्रांति के दौरान जैविक कृषि और समेकित कृषि प्रणाली का महत्व’ है।

कृषि मंत्री ने कहा कि जैविक कृषि एक समेकित कृषि है। इसके द्वारा जैव विविधता, जैविक चक्रण और मृदा जैविक कार्यकलाप संवर्धित होते हैं। जैविक कृषि के द्वारा सिंथैटिक उर्वरकों, विकासगत हार्मोन, वृद्धिकारक एंटीबायोटिक पदार्थो, सिंथैटिक कीटनाशकों के इस्तेमाल के बिना फसलों और पशुओं के लिए पर्यावरण अनुकूल वातावरण उत्पन्न होता है।

केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि सरकार पूर्वोत्तर में जैविक खेती को पूरा बढ़ावा दे रही है।

सिंह ने बताया कि इस क्षेत्र में फसलोपरांत एवं अपशिष्ट प्रबंधन का पूरा विकास नहीं हुआ है, जिसके कारण फार्म उपज का काफी नुकसान होता है, विशेष रूप से बागवानी व पशु उपज का। उत्पादन स्थल के नजदीक ही फसलोपरांत प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन व उत्पाद विकास के लिए प्रौद्योगिकी कार्यकलाप आवश्यक है। इससे न केवल फार्म उपज की सुरक्षा होगी बल्कि रोजगार सृजन भी होगा और किसानों की आय में वृद्धि होगी।

उन्होंने कहा, “खाद्य क्षेत्र को संगठित क्षेत्र बनाने के लिए हमें नीति तैयार करनी होगी।”

केंद्रीय कृषि मंत्री ने जानकारी दी कि पूर्वोत्तर में पहले जहां सात कृषि कॉलेज थे, अब इनकी संख्या 13 है। वर्ष 2014-15 में पूर्वोत्तर राज्यों के लिए कृषि शिक्षा का बजट जहां 150 करोड़ रुपये था, वहीं वर्ष 2016-17 के बजट में इसमें 20 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी करके इसे 170 करोड़ रुपये किया गया है।

उन्होंने कहा कि मौजूदा स्थितियों को ध्यान में रखते हुए युवाओं में कौशल विकास कर उन्हें कृषि उद्यमी के रूप में विकसित करने पर बल दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2016-17 में कृषि अनुसंधान के बजट में लगभग 500 करोड़ रुपये (32.8 प्रतिशत) की वृद्धि की गई है और अब यह 2020 करोड़ रुपये है। वहीं कृषि विस्तार में भी पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 90 करोड़ रुपये (13.6 प्रतिशत) की बढ़ोतरी करके इसे 750 करोड़ रुपये कर दिया गया है।

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