Saturday , 10 December 2016

नेपाल यात्रा सफल, हमारे भाग्य जुड़े हुए हैं : मुखर्जी

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काठमांडू| राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने शुक्रवार को कहा कि उनकी तीन दिवसीय नेपाल यात्रा सफल रही है। उन्होंने कहा कि यात्रा इस बात को दर्शाती है कि भारत, नेपाल के साथ अपने विशिष्ट रिश्ते को और मजबूत करने को कितना महत्व देता है। अपनी यात्रा के समापन के मौके पर राष्ट्रपति मुखर्जी ने एक बयान में कहा, “हमारी तकदीरें एक-दूसरे से जुड़ी हुई हैं और दोनों देश इस बात को मान्यता देते हैं कि साझा समृद्धि को बढ़ाने की जरूरत है।” भारतीय राष्ट्रपति का काठमांडू के बाद जनकपुर और पोखरा में भी शानदार स्वागत किया गया।

उन्हें बिदा करने नेपाल की राष्ट्रपति विद्या देवी भंडारी हवाईअड्डे तक आईं। वह मुखर्जी की अगवानी करने भी हवाईअड्डे पहुंची थीं। इससे पता चलता है कि नेपाल ने भारतीय राष्ट्रपति की यात्रा को कितनी अहमियत दी। मुखर्जी ने कहा कि नेपाल के साथ विभिन्न क्षेत्रों में अपनी भागीदारी को भारत में बहुत ज्यादा महत्व दिया जाता है। एक घनिष्ठ और मित्रतापूर्ण पड़ोसी के रूप में भारत की हमेशा यही इच्छा रही है कि नेपाल में शांति, स्थायित्व और संपन्नता हो।

दोनों देशों के बीच इस बात पर सहमति बनी कि इस समय जारी द्विपक्षीय विकास और संपर्क परियोजनाओं तथा अप्रैल 2015 के भूकंप के बाद नेपाल के पुनर्निर्माण की परियोजनाओं पर ध्यान केंद्रित किया जाए। मुखर्जी को काठमांडू विश्वविद्यालय की मानद डी लिट उपाधि दी गई। काठमांडू और जनकपुर में उनका नागरिक अभिनंदन किया गया और दोनों शहरों की चाबी उन्हें सौंपी गई।

राष्ट्रपति भंडारी, प्रधानमंत्री पुष्प कुमार दहाल और अन्य राजनीतिक नेताओं से मुलाकात में राष्ट्रपति मुखर्जी ने कहा कि भारत, नेपाल के साथ सभी क्षेत्रों में सहयोग को प्राथमिकता देने के लिए प्रतिबद्ध है।

काठमांडू के पशुपतिनाथ मंदिर में पूजा के बाद उन्होंने कहा कि बागमती नदी के किनारे मंदिर के घाटों को सजाने-संवारने के लिए भारत दो छोटी विकास परियोजनाएं शुरू करेगा। काठमांडू विश्वविद्यालय में उपाधि लेने के बाद राष्ट्रपति ने कहा कि साल 2017 से नेपाली विद्यार्थियों को नियमित रूप से भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों में अध्ययन का अवसर उपलब्ध कराया जाएगा। इसके लिए संस्थान की दाखिला परीक्षाओं में नेपाली विद्यार्थियों को बैठने की अनुमति दी जाएगी।

राष्ट्रपति मुखर्जी शुक्रवार को दक्षिण नेपाल के शहर, जनकपुर गए और पवित्र राम-जानकी मंदिर में पूजा अर्चना की। उन्होंने जनकपुर नगरपालिका द्वारा आयोजित नागरिक अभिनंदन समारोह में भी भाग लिया।

जनकपुर में कार्यक्रम में भाग लेने के बाद मुखर्जी पोखरा पहुंचे। नेपाल का यह शहर झीलों के शहर के नाम से भी मशहूर है। यहां राष्ट्रपति ने पेंशन भुगतान कार्यालय में 10,000 पूर्व गोरखा सैनिकों को संबोधित किया। राष्ट्रपति ने अपने बयान में पोखरा यात्रा का जिक्र करते हुए भारत की सुरक्षा में नेपाल के लोगों के योगदान का जिक्र करते हुए इसकी सराहना की।

जनकपुर में राष्ट्रपति ने कहा, “इस प्राचीन नगरी के लोगों ने जिस गर्मजोशी से मेरा स्वागत और सत्कार किया है, उससे मैं अभिभूत हूं। जनकपुर की इस धरती पर आकर मुझे प्रसन्नता की अनुभूति हो रही है। देवी सीता की नगरी जनकपुर भारत और नेपाल दोनों में समान रूप से आदरणीय है। मैं यहां आकर प्रसन्न हूं। जनकपुर हमारी साझा सांस्कृतिक विरासत के सबसे अच्छे उदाहरणों में से एक है।”

राष्ट्रपति ने कहा, “पर्यटन क्षेत्र को बढ़ावा जनकपुर के आर्थिक विकास की कुंजी है। हाल ही में जनकपुर और अयोध्या ने अपने प्राचीन संबंधों को जुड़वा शहर समझौते द्वारा फिर से मजबूत किया है। लाखों तीर्थ यात्रियों को बेहतर सुविधाओं के साथ रामायण पर्यटन क्षेत्र के विकास से न केवल रोजगार के अवसर पैदा होंगे बल्कि हमारी साझा विरासत की कहानी को भी मजबूती प्रदान करेंगे।”

उन्होंने कहा कि जनकपुर के चारों ओर परिक्रमा पथ पर दो धर्मशालाओं के निर्माण की घोषणा करते हुए उन्हें प्रसन्नता हो रही है। नेपाल के लोगों की प्राथमिकताओं को ध्यान में रखते हुए दोनों सरकारें संपर्क मार्ग के विकास और तराई की सड़कों, सीमा के आर-पार रेल संपर्कों, समेकित जांच चौकियों, विद्युत वितरण लाइनों के कार्यान्वयन पर विशेष ध्यान दे रही हैं।

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