Saturday , 10 December 2016

दिल्ली हाई कोर्ट का बड़ा फैसला कहा मां-बाप के घर पर बेटों का अधिकार नही

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दिल्ली हाई कोर्ट, जस्टिस प्रतिभा रानी, कानूनी अधिकार, मां-बाप के घर पर बेटों का नहीं अधिकार

Court Order

नई दिल्ली। दिल्ली हाई कोर्ट ने मंगलवार को एक याचिका पर सुनवाई करते हुए पैतृक संपत्ति को लेकर एक बड़ा फैसला सुनाया है। याचिका को खारिज करते हुए माता-पिता के हक में फैसला सुनाते हुए कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि बेटे की वैवाहिक स्थिति चाहे जो भी हो, उसका पिता के बनाए घर में रहने का पास कोई कानूनी अधिकार नहीं है। वो अगर उस घर में रहता है तो माता-पिता की दया पर ही रह सकता है।

जस्टिस प्रतिभा रानी ने अपने फैसले में यह भी कहा कि अगर मां-बाप के अपने बेटे से संबंध अच्छे नहीं हैं तो इसका ये कतई मतलब नहीं कि वो इस बोझ को ताउम्र ढोते रहें। अपने आदेश में जस्टिस प्रतिभा रानी ने कहा कि बेटा और उसकी पत्नी यह साबित करने में नाकाम रहे हैं कि वे भी प्रॉपर्टी में हिस्सेदार हैं, जबकि माता-पिता ने कागजी सबूतों के जरिए अपना मालिकाना हक साबित किया है।

हाई कोर्ट में एक व्यक्ति और उसकी पत्नी द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रहा था। याचिका को खारिज करते हुए कोर्ट ने माता-पिता के पक्ष में फैसला सुनाया। इससे पहले निचली अदालत ने भी माता-पिता के पक्ष में ही फैसला दिया था, जिसे इस दंपत्ति ने उच्च न्यायालय में चुनौती दी थी।

इस मामले में माता-पिता ने लोअर कोर्ट को बताया था कि उनके दोनों बेटों और बहुओं ने उनका जीवन नर्क बना दिया है। माता-पिता ने इस संबंध में पुलिस से भी शिकायत की थी और पब्लिक नोटिस के जरिए भी बेटों को अपनी प्रॉपर्टी से बेदखल कर दिया था। दोनों बेटों ने माता-पिता के आरोपों को नकारते हुए इसके खिलाफ ट्रायल कोर्ट में याचिका दायर की थी।

 

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