Saturday , 10 December 2016

इन तरीकों से आपके कार्ड की जानकारी हो सकती है लीक

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कैशलेस इकॉनमी, डेबिट/क्रेडिट कार्ड का महत्वब

debit credit card

नई दिल्ली। कैशलेस इकॉनमी में डेबिट/क्रेडिट कार्ड का बड़ा ही महत्‍व है लेकिन हर अच्‍छाई के पीछे कुछ बुराई भी होती है तो उसी क्रम में डेबिट/क्रेडिट कार्ड में फ्रॉर्ड करना भी शामिल है। इन दिनों डेबिट/क्रेडिट कार्ड से जानकारी चुराने के कई मामले सामने आए हैं। इन मामलों में यूजर्स की जानकारी हैक कर उनका गलत इस्तेमाल किया गया है।

ऐसे में आपको ऐसी कुछ जानकारियां होनी जरूरी हैं जिससे आप डेबिट/क्रेडिट कार्ड के द्वारा होने वाले फ्राड से बच सकें। इन जानकारियों से आप यह पूरी तरह समझ पाएंगें कि आखिर आपके कार्ड की जानकारी कैसे लीक होती है और आप अपनी जानकारी को कैसे सुरक्षित रख सकते हैं।

1- फ्रॉड करना:

एक्सपीरियन इंडिया के एमडी जयारमन के मुताबिक, डाटा स्कीमिंग डिवाइस में अगर यूजर अपना कार्ड स्वाइप करता है तो उनकी पूरी जानकारी कॉपी कर ली जाती है। ऐसे में आपको बेहद सतर्क रहने की जरुरत है।

2- मदद करने के बहाने पिन चुराना:

अगर कभी आपका कार्ड मशीन में फंस जाए या फिर किसी टेक्नीकल प्रॉब्लम के चलते एटीएम से पैसे न निकल पाए, तो एटीएम में खड़े किसी भी व्यक्ति से मदद न लें। ऐसे लोग जो आपकी मदद के लिए आगे आते हैं वो आपका पिन चुरा सकते हैं।

3- डेबिट/क्रेडिट कार्ड का पिन:

कई ऐसे मामले देखे गए हैं जब यूजर ने अपने कार्ड के ऊपर उसका पिन नंबर लिखा होता है, जिससे वो उसे भूल न जाए। ऐसे में अगर आप गलती से अपना कार्ड एटीएम में भूल जाते हैं तो उसका गलत उपयोग हो सकता है।

4- ऑनलाइन भुगतान:

आपको बता दें कि ऑनलाइन शॉपिंग या फिर बिल पेमेंट के दौरान जब यूजर अपने कार्ड का डाटा वेबसाइट पर डालता है तो उसे हैकर्स आसानी से हैक कर सकते हैं। ऐसे में ध्यान रहे कि कभी भी आप अपनीी जानकारी किसी भी साइट और अपने फोन में सेव न करें। इसके अलावा कोशिश करें कि पेमेंट सिर्फ विश्वसनीय साइट पर ही की जाए।

5- फार्मिंग:

इसमें हैकर्स या फ्रॉड्स आपको किसी फेक वेबसाइट पर ले जाते हैं जो बिल्कुल वास्‍तविक साइट की तरह ही दिखती है। अगर यूजर ऐसी किसी भी साइट के द्वारा पेमेंट कर देते हैं तो उनके डेबिट/क्रेडिट कार्ड की जानकारी हैक हो सकती है।

6- पब्लिक वाइ-फाइ का प्रयोग करना:

अगर आप पब्लिक वाइ-फाइ से अपने फोन को कनेक्ट करते हैं और उसी के जरिए ऑनलाइन पेमेंट करते हैं, तो ध्यान रहे कि आप हैकर्स को अपनी जानकारी चुराने का कोई अवसर दे रहे हैं।

7- मालवेयर:

यह एक ऐसा सॉफ्टवेयर है जो एटीएम के सिस्टम को खराब कर देता है और यूजर का डाटा चुरा लेता है।

8- यूजर के नंबर की डुप्लीकेट सिम:

ऐसे मामले भी सामने आए हैं जब हैकर्स फेक आईडी के साथ मोबाइल ऑपरेटर के पास जाते है और उनसे डुप्लीकेट सिम जारी कराते हैं। जिससे ऑपरेटर पहली वाली सिम को डिएक्टीवेट कर देते हैं।

ऐसा करने से ऑनलाइन लेन-देन के ओटीपी नए सिम पर आते हैं। ऐसे में ध्यान रहे कि कहीं भी आप अपने कार्ड की डिटेल्स सेव न करें। अगर आप ऐसा करते हैं तो ऑनलाइन भुगतान के लिए महज ओटीपी की ही जरुरत पड़ती है।

9- एप्स के जरिए:

कई ऐसी एप्स होती हैं जिन्हें प्ले स्टोर से डाउनलोड न कर किसी थर्ड पार्टी से डाउनलोड किया जाता है। ऐसी एप्स आपकी निजी जानकारी चुरा सकती हैं। ऐसी एप्स के द्वारा ऑनलाइन पेमेंट न ही किया जाए तो बेहतर है।

10- नए कार्ड को चोरी करना:

कई ऐसे हैकर्स भी होते हैं जो यूजर के पास नया कार्ड पहुंचने से पहले ही उनकी जानकारी लीक कर लेते हैं। ये जानकारी मेल द्वारा चुराई जाती है।

 

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