Thursday , 27 April 2017

नाकेबंदी, नोटबंदी से भारत-म्यांमार सीमा व्यापार बुरी तरह प्रभावित

भारत-म्यांमार अंतर्राष्ट्रीय सीमा, यूनाईटेड नागा काउंसिल, मिजोरम-म्यांमार

India Myanmar Border

इम्फाल | भारत-म्यांमार अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर जनजातीय लोगों के बीच वैध कारोबार यूनाईटेड नागा काउंसिल की मणिपुर के खिलाफ एक नवंबर से जारी नाकेबंदी के साथ-साथ भारत सरकार की नोटबंदी से बुरी तरह प्रभावित हुआ है।

नागा काउंसिल के प्रदर्शनकारी सरद हिल्स जिला गठित करने की मणिपुर सरकार की पहल को लेकर आंदोलित हैं। उन्हें डर है कि कुछ नागा बाहुल्य इलाके भी प्रस्तावित जिलों में शामिल हो सकते हैं।

अंतर्राष्ट्रीय सीमा के किसी भी तरफ के जनजातीय लोगों के बीच होने वाला करोड़ों रुपये का परंपरागत व्यापार वर्ष 1995 से ही वैध है। इससे राजकोष में पर्याप्त धन आता है।

सीमा पर मणिपुर के मोरेह और म्यांमार के नामफेलांग और तामु में व्यापार केंद्र स्थित हैं। केंद्र सरकार के आठ नवंबर को 500 और 1000 रुपये के नोट बंद करने के फैसले ने सीमा पर व्यापारियों के दुख और बढ़ा दिए हैं।

आईबोपिशाक नामक एक व्यापारी ने कहा, “म्यांमार के व्यापारी पहले म्यांमार के नामफेलांग और तामु में भारतीय मुद्रा को स्थानीय तय (अवैध रूप से) मुद्रा विनिमय दर से आसानी से 100 रुपये के बदले 1900 क्यात(म्यांमार की मुद्रा) में ले लेते थे। नोटबंदी के बाद अब 100 रुपये गिरकर 800 क्यात के बराबर रह गया है।”

मोरेह में पिछले कुछ दिनों से बैंकों में और जो दो एटीएम हैं, उनमें रुपये ही नहीं हैं।

मोरेह में व्यापार करने वाले एक दक्षिण भारतीय ने कहा कि वह गंभीरता से अपने व्यवसाय को मिजोरम-म्यांमार सीमा पर ले जाने के बारे में सोच रहा है, क्योंकि वहां मणिपुर में जैसे नागा कर रहे हैं, उस तरह की कोई बाधा नहीं है।

शमीर हुसैन नामक एक व्यापारी ने कहा कि कभी मोरेह में 60 हजार बाहरी व्यापारी हुआ करते थे, लेकिन आज मुश्किल से 10 हजार बचे हैं। शेष कहीं दूसरी जगह चले गए।

एक छोटे व्यापारी रश्मि बीब ने कहा, “व्यापार में कमी के लिए जबरन वसूली भी जिम्मेदार है। मोरेह-पालेल के 60 किलोमीटर के रास्ते में 14 जांच चौकियां और पुलिस थाने हैं। उन पर म्यांमार से सामान लाने वाले व्यापारियों को लाए गए सामान का एक निश्चित प्रतिशत में रिश्वत देनी पड़ती है। पलेल और इंफाल के बीच 40 किलोमीटर में जांच के लिए कुछ और नाके हैं।”

 

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